Sunday, October 01, 2006

Great Lines !

The lines which appear at Vidya Balan's entry in Munnabhai - Lage Raho!
Really liked them ... and thanks to Sushant for putting in the fight and typing them out in Devnagari script !

Good Morning ...... Mumbai !
This is Jhanvi on World Space Radio
जाने से पहले, ये है मेरा आज का ख्याल
उन सबके लिये, जो दौड़े जा रहे हैं इस शहर की दौड़ में
शहर की इस दौड़ में दौड़ के करना क्या है?
अगर यही जीना है दोस्तों, तो फिर मरना क्या है?
पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फिक्र है, भूल गए भीगते हुए टहलना क्या है?
सीरियल के किरदारों का सारा हाल है मालूम, पर माँ का हाल पूछने की फुरसत कहाँ है?
आप रेत में नंगे पाँव टहलते क्यूँ नहीँ?
एक सौ आठ हैं चैनल पर दिल बहलते क्यूँ नहीँ?
इंटरनेट पे दुनिया से तो टच में हैं, लेकिन पड़ोस में कौन रहता है जानते तक नहीँ!
मोबाइल, लैंडलाइन सब की भरमार है, लेकिन जिगरी दोस्त तक पहुँचे, ऐसा तार कहाँ है?
कब डूबते हुए सूरज को देखा था, याद है?
कब जाना था शाम का गुज़रना क्या है?
तो दोस्तों, शहर की इस दौड़ में दौड़ के करना क्या है?
अगर यही जीना है दोस्तों, तो फिर मरना क्या है?

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